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मैंने पहले तो चाय पी, फिर अपने दरवाज़े के सामने खड़ा हो गया। अचानक आँटी ने अपना दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर आँटी ने मुझे कहा “बेटा, क्या तुम हमारा एक काम कर दोगे?”

“कहिए आँटी जी,” मैंने डरते हुए कहा। उन्होंने कहा, “बेटा, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है, तुम मेरा एक डिब्बा उतार दो। ”

मैंने कहा- ठीक है। फिर मैं उनके घर चला गया, वहाँ ऊँचाई पर एक डिब्बा रखा हुआ था, आँटी ने बताकर कहा,”बेटा यही डिब्बा उतारना है।

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