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मैं अब रागिनी को सातों आसमान की सैर एक साथ करा रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने रागिनी की चूत से मुँह हटाया। वो बिल्कुल निढ़ाल दिख रही थी। मैंने उसको तकिये के सहारे बिठा दिया और अपने दाहिने हाथ की बीच वाली ऊँगली चूत में घुसा दी। फ़िर ऊपर की तरफ़ उँगली को चलाते हुए रागिनी के जी-स्पॉट को खोजना शुरु किया, और तभी रागिनी का बदन हल्के से काँपा।

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