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कुछ देर तक हम दोनों हू अराम से लेते रहे और यहा वहां की बाते करते रहे। पर वो जल्दी ही फिर से उत्तेजित हो गये। मेरा दिल भी कहा भरा था, चुदाने को लालायित था। वो बोल ही पड़े। “समधन जी, अब बारी है दो नम्बर की. . . जरा टेस्ट को बदले”

“वो क्या होता है जी. . . ” मैं हैरान सी रह गई

“आपकी प्यारी सी गोल गाण्ड को तैयार कर लो .

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