वो खुद ही घर का सारा काम करते थे और खाना भी बनाते थे. जब उन्हें खाना बनाने में और घर का काम करने में दिक्कत होने लगी तो उन्होने डॉली भाभी को भी पटना बुला लिया. मम्मी तो थी नहीं केवल पापा ही थे. कुच्छ दीनो के बाद पापा का भी स्वरगवस हो गया तो भैया ने मुझे अपने पास ही रहने के लिए बुला लिया. मैं उनके पास पटना आ गया और वहीं रह कर पढ़ाई करने लगा.
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