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“अरे, पूछता क्या है. तेरा ही घर है. ”

महेश अंदर गया तो चंदा गहरी सोच में पड़ गयी. यह सब क्या हो रहा था. उसे ज्ञात था कि यह शायद कुछ गलत था, परन्तु उसे रोक पाने में वो खुद को बहुत लाचार महसूस कर रही थी. महेश लौटा तो एक सफ़ेद रंग कि हाफ पैंट पहने था. तौलिए से पोछने के बावजूद शरीर पर लगे पानी को सोख कर उसके पैंट उसके लिंग से सैट कर उसके आकार और प्रकार का प्रदर्शन कर रहा था.

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