मैं उसका इशारा समझ गया और उससे कहा- ठीक है तो चलो खाना भी कहीं बाहर ही खाते हैं। वो तैयार हो गयी। कोफ़ी पीते पीते मैंने उससे पूछा कि तुम्हारा पति अक्सर बाहर रहता है तो तुम रोज़ कैसे दिन और रात निकालती हो?
वो इसी बात की राह देख रही थी शायद, वो बोली- वो घर पे होते हैं तो भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता। वो मुझे कभी संतुष्ट नहीं कर पाया है।