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मेरा दिमाग़ सिर से निकल कर लंड के मत्थे में जा बैठा था और मेरी सुनता नहीं था। मैने लाख चाहा फिर भी धक्के की रफ़्तार अपने आप बढ़ने लगी पूर्वी के कूल्हे भी ज़ोरों से हिलने लगे। मैने सोचा कि पोजिशन बदलने से चुदाई लंबी चल सकेगी। मैने कहा: तू ऊपर आ जा। उसे बाहों में भरकर मैं पलटा और नीचे आ गया। तुरंत पूर्वी धक्के लगाने लगी आगे पीछे सीधे गोल ऐसे सब तरह से उसने नितंब घुमा कर लंड से अपनी क्लाइटोरिस रगड़ दी।

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