जो ने वहाँ पर किसी को फ़ोन किया और रवाना हो गये। दिन के ११ बज रहे थे हम लोग बीच पर पहुँच गए थे। समुद्र का किनारा बहुत ही सुहाना लग रहा था. . . लहरें बार-बार किनारे से टकरा कर लौट रहीं थीं। हम सभी लगभग १२ बजे तक वहाँ रहे तभी जो को एक आदमी ने कुछ कहा और लौट गया। “चलो. . . ! लँच तैयार है. . . ! ”
सभी ने अपना सामान एकत्र किया और एक होटल की तरफ़ चल दिये।