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. . मेरे रूप को पार्लर में निखार दे दिया था . . . विनय सच में हीरे की पहचान रखता था। घर पर मेरा पुत्र सचिन भी मुझे पहचान नहीं सका . . . बोला,”मैडम . . . मां घर पर नहीं है . . . . . . ” मैंने उसे गोदी में उठा कर चूम लिया . . . वो हैरानी से देखता रह गया। रात होते ही अपनी चमचमाती काली कार में सचिन के साथ हम एक फ़ाईव स्टार होटल में डिनर कर रहे थे।

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