सब ९-१० बजे तक काम में चले गये और चाची घर में ही थी। शायद वो आज छुट्टी पर थी। उनका एक मेहमान भी आया था, २-३ घंटे बाद मैं बोर होने लगा, मैंने चाची जी को बोला- मैं चलता हूँ !
उन्होंने बोला- हैं ? तुम्हारे चाचा जी के आने तक इनके साथ में रहो !
मैने कहा- ठीक है, कुछ देर बाद वो मेहमान जाने लगा तो चाची ने कहा- विजय, जाओ, इनको स्टेशन तक छोड़ कर आना !
मैं बात मान गया।