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अब मैं भी नीचे से चूत उठा कर उसकी सहायता कर रही थी। और ……और ……हाय मैं भी कहां तक रोक पाती…अन्तत: मैं भी झड़ने लगी। मैं चुपचाप उत्तेजना सहती रही और झड़ती रही। फिर सीट पर ठीक से साड़ी करके बैठ गयी। अपने ब्लाउज के बटन ठीक से लगाये और हम सीट पर आराम से बैठ गये। हमारा काम हो गया था……इसलिये हम सिनेमा हाल से बाहर आ गए।

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