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मैंने जानबूझ कर पीछे से अपना लौड़ा धीरे से लगा दिया। वो उस समय भी लगभग छः इंच का था। दीदी को गर्म सा लगा तो उन्होंने अपनी गांड को आगे करके मुझसे दूर कर लिया। अब मैं बहनों की ताक में लग गया था, अब मैं किसी बहाने अपनी दोनों बहनों के वक्ष पर हाथ स्पर्श कर देता था। एक दिन किस्मत से दीदी मुझे स्कूटी पर बिठाकर अपनी सहेली के घर गई थी।

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