मैं उसकी किसी और हरकत का इन्तज़ार करने लगी। पर जब कुछ नहीं हुआ तो मैंने पीछे पलट कर देखा। वहां कोई भी नहीं था। अरे … वो कौन था ? कहां गया ? कोई था भी या नहीं !!!
कहीं मेरा भ्रम तो नहीं था। नहीं नहीं भ्रम नहीं था। मेरे पेटीकोट में चूत के मसले जाने पर मेरे काम रस से गीलापन था। मैं तुरन्त समधी के कक्ष की ओर बढ़ी।