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“समधन जी, बरसों से तुम भी प्यासी, बरसों से मैं भी प्यासा . . . पानी बरस जाने दो !” हम दोनों ने शरीर पर खुशबू लगा रखी थी। उसी खुशबू में लिपटे हुये हम एक होने की कोशिश करने लगे। “आपको मेरी कसम जी . . . दिल बहुत घबराता था . . . मेरे जिन्दगी में फिर से बहार ला दो !”

” तो समधन जी आओ एक तन हो जाये . . .

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