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. . . . . मेरी चूत में मीठी मीठी गुदगुदी तेज हो उठी. मन में सिस्कारियां भर रही थी. अब लग रहा था कि अब मैं गयी . . . . . . मैंने चूत को ऊपर दबाते हुए जोर से पानी छोड़ने लगी. मेरा मुंह उसके होटों से चिपका था. कुछ बोल नहीं पाई. और अब पूरा पानी छोड़ दिया. उधर अनिल ने भी अपनी रफ़्तार तेज कर दी. मैं झड़ चुकी थी और अब उसका लंड का मोटापन और उसका भारी पन महसूस होने लगा था.

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