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मैने उसका पल्लू पकड़ लिया. “ऐसे नही आरती , ऐसे मत जाओ प्लीज़ . मैं तुम्हारे साथ कुछ और देर रहना चाहता हूँ” मेरे स्वर में विनती थी”नही बाबूजी मैं और नही रुक सकती. आप इतने लंबे और मैं इतनी छोटी , हमारा मिलन कैसे होगा “वो बोली और इसी छीना झपटी में उसकी साड़ी खुल गयी. उसने अपनी बाहे अपने सीने पर रख ली.

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