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लल्लन तो कभी इन्हे चूस्ता ही नही “”क्या कहती हो आरती रानी लल्लन इन चुचियों को नही चूस्ता . भला ऐसा कौन सा मर्द होगा जो तुम्हारी इन मदभरी चुचियों को छोड़ देगा “” सच कहा बाबूजी आपने कोई मर्द नही छोड़ेगा लेकिन लल्लन मर्द कहाँ वो तो नामर्द है , हिज़ड़ा है हरामी “आरती क़ी आँखे भर आई”तो फिर ये बच्चा किसका है आरती रानी “मैं चोंक गया था”ये बच्चा भी आप जैसे किसी बाबू का है बाबूजी दो साल पहले उनसे ऐसे ही मिली थी जैसे आज आप मिल गये बाबूजी और उन्होने अपने प्यार क़ी निशानी ये बच्चा मेरे पेट में डाल दिया ” मैने आरती को अपने पास खींच लिया और जी भर कर चूमा”तो क्या तुम मेरे बच्चे को भी जन्म दोगी आरती रानी ” धीरे धीरे वासना क़ी जगह प्यार ने ले ली” हाँ बाबूजी मैं आपके बच्चे को जन्म दूँगी , आज आप अपना बच्चा मेरे पेट में डाल दो , बाबूजी आप का बच्चा आप ही क़ी तरह होना चाहिए लंबा और तगड़ा बाबूजी .

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