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ट्यूशन के बाद, पास में ही वह कथक सीखने जाती थी. शाम को ७ बजे तारा या चंदर उसे ले आते. उन सबके जाने के बाद, चंदा ने सोचा कि ७ बजे के पहले कोई आने वाला तो है नहीं, न ही उसे कहीं जाना था. गर्मी भी काफी थी, उसपर से उमस ने उसका हाल बुरा कर दिया था. घर के सारे परदे लगा कर चंदा ने अपने सारे कपडे निकाल दिए और पंखा तेज कर नंगी होकर टी.

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