दीदी धीरे-धीरे से झटके मारने लगी और मज़ा आने लगा। मुझ में फिर से जोश आ गया और मैंने दीदी की गांड में जोर-जोर से झटके मारने शुरू कर दिया। मैंने लंड को बाहर निकाला और वापस ज़ोऱ से अंदर डाला और धीरे धीरे से चोदने लगा, साथ में चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा। मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?
तो बोली- प्लीज़ मुझे मत पूछो !
मैंने उससे कहा- दीदी, तुमको आज मैंने एक बहन से पत्नी बना दिया है, तुम्हारी आज प्रौन्नति हुई है, तुझे चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसा मज़ा तो मुझे कभी नहीं आया !
उसने भी मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया।