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आठवीं तक वह गांव में ही पढ़ रहा था. नौवीं से उसके माता पिता ने उसे इलाहाबाद उसके नाना नानी के यहाँ भेज दिया. शहर में कुछ अच्छे स्कूल थे जो गांव में कभी नहीं हो सकते थे. उसके माता पिता चाहते थे कि चंदर मेहनत करे और पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बने. महेश को इलाहाबाद में किसी ने बताया कि मर्चंट नवी में भविष्य अच्छा है.

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