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” फिर बाबुजी ने माजी को पलंग पर दल कर्चित लेटा दिया और उनके पैर अपने कांडों पर रख कर अपना लुन्द्माजी कि छूट मी एक झटके से दल दिया. माजी ओह! ओह! करने लागिऔर अपनी कमर उचल उचल कर बाबुजी का लुंड अपने छूट मी लेने लगी. सास कि गर्मी देख कर ससुरजी ने भी जोर जोर से अपना लुन्दंदर बाहर करने लगे. तब बाबुजी ने कहा, “अरी सुन, जरा मुझीह बता कि सुधा नंगी कैसे लगती है?” माम्जी ने पूछा, “क्योंतुम्हे इससे क्या लेना देना?” बाबुजी बोले, “अरी कुछ नही, मुझेसुधा देखने मी अच्छी लगती है इसीलिए पूछा रह हूँ कि सुधानंगी कैसे लगती है?” “क्या तुम सुधा कि लेना चाहते हो?” माजीने बाबुजी से पूछा.

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