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लेकिन उसके शरीर में कोई देखने लायक अंग अगर था, तो वो थे उसके नितंब, कूल्हे यानि कि ‘गांड’. ३६ कि गदराई गोलाइयों को चंदर खूब मसलते थे. उसकी जांघें गदराई हुई थी. यह सब देखते देखते और चंदर के साथ बिताए पलों के बारे में सोचते सोचते उसे अचानक याद आया कि उसे साड़ी पहन लेनी चाहिए. सबेरे उठ के चंदर और तारा को तैयार करके, उनका दोपहर का खाना बांध कर उसने उन्हें विदा कर दिया था.

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