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. . . ठीक दस बजे शेखर दफ्तर में दाखिल हुआ। सबने उसका अभिनन्दन किया और शेखर ने सबके साथ हाथ मिलाया। जब प्रगति शेखर के ऑफिस में उस से अकेले में मिली शेखर ने ऐसे बर्ताव किया जैसे उनके बीच कुछ हुआ ही न हो। वह नहीं चाहता था कि दफ्तर के किसी भी कर्मचारी को उन पर कोई शक हो। प्रगति को उसने दफ्तर के बाद रुकने के लिए कह दिया जिस से उसके दिल की धड़कन बढ़ गई।

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