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बिस्तर में लेटते लेटते लान्खो ख्याल उसके मन से गुज़र रहे थे. “मुझे चोदो ना गोलू, मेरे बेटे” “फाड दो मेरी चूत” “पागल मत बन, यह सब क्या सोच रही है?” इत्यादि, इत्यादि. उसने उसे गोद में खिलाया था. पर आज उसके तन मन में जो आग लगी थी, उसका वो क्या करे? इसी कश्मोकश में उसने अपनी साड़ी ढीली की और पेट्टीकोट का नाडा खोल कर अपनी ऊँगली से अपनी चूत सहलाई.

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