वो उदास लग रही थी। मैंने कहा- हाँ बोलो जान ! क्या बात है?
वो बोली- कुछ नहीं ! मिलने का मन कर रहा था। मैंने कहा- इतनी रात को?
कोई बात तो है ! मैंने कहा। नहीं कुछ नहीं है !
मैंने कहा- ठीक है, नाराज क्यों होती हो?
मैं बोला- मुझे ठण्ड लग रही है !
उसने अपनी शॉल मुझे दे दी। मैं खेत की मेढ़ पर बैठा था, वो मेरे आगे पीठ करके नीचे बैठी थी।