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. . . धीरे धीरे ठण्ड के सरूर के साथ दोनों के शरीर में कंपकंपी चालू हो गई, बातों के दौर में कब उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ कर मुझे अपनी बाहों में ले लिया मुझे पता ही नहीं चला. . . . . . . . . फिर उन्होंने दो डेस्क साथ लगा ली और उसके ऊपर बैठ कर मुझे अपनी बाहों में ले लिया। मैं भी भूखे शेर की तरह उनके ऊपर चढ़ गया।

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