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उसने भी मुझे बाहों मे जकड़ लिया। वो बोली- यहाँ कोई देख लेगा। मैं खड़ा हुआ और उसे घुटनों और गर्दन से हाथों में उठा एक ज्वार की फसल के बराबर में ले आया और खड़ा कर दिया। मैंने पूछा- दोपहर को क्यों भाग आई थी?

वो शरमा गई- धत ! तुम गन्दे हो। मैं बोला- इसमें गन्दा ही क्या ?

उसने कहा- वहाँ कोई देख लेता तो ?

मैंने कहा- ठीक है।

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