घुसा दे अपना लण्ड. . . बोल मेरी चूत मारेगा ना. . . ?” भाभी की छाती धौंकनी की तरह चलने लगी। इतनी देर में मेरे लण्ड में मिठास भर उठी। मेरी घबराहट अब कुछ कम हो गई थी। मैंने भाभी की चूंचियाँ दबाते हुये कहा,”रुको तो सही . . . मेरा बलात्कार करोगी क्या, भैया को मालूम होगा तो वो कितने नाराज होंगे !”
भाभी नरम होते हुए बोली,” उनके रुपयों को मैं क्या चूत में घुसेड़ूगी .