”
तो उन्होंने गुस्सा करके कहा,”मुझे चाची मत बोल . . . या तो पारुल जान कहो या सिर्फ जान कहो . . . . ”
मैंने देखा कि इतनी गर्म चूत तो दोनों बहनों की भी नहीं थी !
छोटी छोटी झांटें हाथ में चुभ रही थी और एक मोटा सा दाना भी स्पर्श हो रहा था, मैंने कहा, “पारुल जान, यह क्या है?”
वो बोली,”यही तो सबसे बड़ी क़यामत है .