. . ” मैं उसकी अनोखी भाषा से खुश हो गई। “आह, धीरे से, यह तो बहुत मोटा है . . . और धीरे से !”
सच में सुरेश का लण्ड तो बहुत ही मोटा था। चूत में घुसाने के लिये उसे जोर लगाना पड़ रहा था। चूत में घुसते ही मेरे मुख से चीख सी निकल गई। “जरा धीरे . . . चूत नाजुक है . . . कहीं फ़ट ना जाये। ” मेरे मुख से विनती के दो शब्द निकल पड़े।