भाभी अब भी बेख़ाबर सो रही थी और
मेरा लंड एकदम फाड़ फादा रहा था. सिर्फ़
ब्लाउस के उपर से उनकी चुचि दबा कर मज़ा नहीं आ रहा था. देल्ही के बस और लोकल ट्रेन मे ना जाने
कितनी लड़कियों की चुचि दबाई थी मैने. मैने सोचा अब असली माल को टटोला जाए और अपना
हाथ उठा कर भाभी की जाँघो पर रख दिया. मेरा हाथ उनकी सारी पर पड़ा पर मूज़े मालूम था अगर मैं
अपना हाथ तोड़ा नीचे सरका लू तो मूज़े उनकी
जंघे खुली मिलेगी.