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फिर भी उसका सुपारा फ़क से अन्दर घुस पड़ा। “समधन जी, आपकी भोसड़ी तो बिल्कुल नई नवेली चूत की तरह हो गई है . . . इतने सालों से सूखी थी क्या . . . एक भी लण्ड नहीं लिया?”

“धत्त, आपको मैं क्या चालू लगती हूँ ?”

“हां , सच कहता हूँ, आपकी आंखों में मैंने चुदाई की कशिश देखी है . . . उनमें सेक्स अपील है . . . मुझे लगा तुम तो चुदक्कड़ हो, एक बार कोशिश करने क्या हर्ज़ है?”

“सच बताऊँ, आपको देख कर मेरे दिल में चुदवाने की इच्छा जाग गई थी, एक सच्चे मर्द की यही खासयित होती है कि उसमें बला का सेक्स आकर्षण होता है।

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