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झरते झरते भी मैं उसे बस छोड़ता ही रहा छोड़ता ही रहा. “प्रतिमा, . . बहुत टेस्टी चुदाई थी यार. तुम तो ग़ज़ब की चीज़ हो. ” “मुझे भी बहुत मज़ा आया, विजय साहब. ” वो कस मुझे पकड़ते हुए बोली. उसकी चुचियाँ मेरे सीने से लग कर एक अलग ही आनंद दे रही थी. दोस्तों, हुँने फिर 20 मिनिट बाद, पहले तो उसके बर को छाता और उसने मेरे लंड को चूसा हल्के हल्के .

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