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वो भी कमर तक पानी में मेरे ठीक सामने आ के खडी हो के डुबकी लगाने लगती और मुझे अपने चुचियों का नजारा करवाती जाती। मैं तो वहीं नदी में ही लंड मसल के मुठ मार लेता था। हालांकि मुठ मारना मेरी आदत नही थी। घर पर मैं ये काम कभी नही करता था, पर जब से मां के स्वभाव में परिवर्तन आया था, नदी पर मेरी हालत ऐसी हो जाती थी की, मैं मजबुर हो जाता था।

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