हम दोनो ने जो कुछ भी किया है, उसका मैं किसी को पता नही चलने दुन्गा। ”
तब मां उठ कर खडी हो गई। अपनी साडी के पल्लु को और मेरे द्वारा मसले गये ब्लाउस को ठीक किया और मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए, अपनी बुर को अपनी साडी से हल्के-से दबाया और साडी को चुत के उपर ऐसे रगडा जैसे की पानी पोंछ रही हो। मैं उसकी इस क्रिया को बडे गौर से देख रहा था।