पर उसे क्या, वो तो कहीं देसी पी के सोया पडा होगा। शाम होने को आई, मगर अभी तक नही आया। ”
“अरे, तो इस में बापु की क्या गलती है ? मौसम ही गरमी का है। गरमी तो लगेगी ही। ”
“अब मैं तुझे कैसे समझाउं, कि उसकी क्या गलती है ? काश, तु थोडा समझदार होता। ”
कह कर मां उठ कर खाना बनाने चल देती। मैं भी सोच में पडा हुआ रह जाता कि, आखिर मां चाहती क्या है ?
रात में जब खाना खाने का टाईम आता, तो मैं नहा-धो कर किचन में आ जाता, खाना खाने के लिये।