About:

मां ने भी एक गठर को उठा लिया और अब हम दोनो मां-बेटे जल्दी-जल्दी गांव के पगदंडी वाले रास्ते पर चलने लगे। गरमी के दिन थे, अभी भी सुरज चमक रहा था। थोडी दूर चलने के बाद ही मेरे माथे से पसिना छलकने लगा। मैं जान-बुझ कर मां के पिछे-पिछे चल रह था, ताकि मां के मटकते हुए चुतडों का आनंद लुट सकुं, और मटकते हुए चुतडों के पिछे चलने का एक अपना ही आनंद है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*