About:

मैं झड़ कर उठ खड़ी हुई। फिर से एक बार कुर्सी पर बैठ गई। तभी दादी ने मुझे पुकारा। मेरे विचारो की श्रृंखला भंग हो गई। मैंने फ़ुर्ती से अपनी ब्रा और चड्डी ली और नीचे भाग आई। दादी ने मेरे हाथ ब्रा और चड्डी देखी तो मुस्करा पड़ी। फिर दादी भोजन की थाली रख कर सोने चली गई थी। मैं भी भोजन करके अपने कमरे में आ गई।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*