“ओह … भूरा… मार दी मेरी गाण्ड … अच्छा चल … शुरू हो जा !” मैं आनन्द से लबरेज हो कर मचल पड़ी। “दीदी सच कहूँ, सारा रस तो तेरे चूतड़ों की गोलाईयों में ही तो है … मेरा मन इन्हें मटकते देख कर मचल जाता है और लगता है कि बस अब तेरी गाण्ड चोद दूं। ”
उसकी सारी आसक्ति मेरे चूतड़ों की सुन्दरता पर थी, जिसे देख कर उसका लण्ड फ़ड़क उठता था।