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. . . फिर दोनो एक दूसरे से चिपक कर सो गये. सुबह का सूरज उग चुका था और अपनी रोशनी चारों तरफ़ फ़ैलाने लगा था. सूरज की किरणें कमरे के परदों से होती हुई कमरे को उजाले से भरने लगी जिसमे रिया और जय एक ही बिस्तर पर सो रहे थे. आज से पैहले कभी दोनो ने पूरी रात साथ सोकर नही गुज़ारी थी. पिछले कयीं सालों मे वो एक दूसरे को अच्छी तरह समझ चुके थे.

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