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. . ?”

“हां मौसी, सुन्दर तो है, पर मेरे से वो बात ही नहीं करता है. . . ” कविता अपनी चूंचियां रूपा की बांह से दबाती हुई बोली। रुपा को कविता की बैचेनी का अहसास हो गया था। उसने अपनी बांह को उसकी चूंचियों पर और दबाते हुए कहा,”अरे, वो तो तुम्हारी ही बात करता है . . . कहो तो उससे दोस्ती करा दूँ. . . !”

कविता को अपनी चूंची पर दबाव महसूस हुआ तो उसके मन में तरगें फ़ूट पड़ी।

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