. . प्लीज आ जाओ ना. . . ”
“अभी से कहाँ कविता जी. . . जवानी का मजा तो लो अभी . . . ” अब आशू के हाथ उसकी चूत की पंखुड़ियो के आस पास सहला रहे थे। बीच बीच में चूत के ऊपर कविता की यौवन-कलिका को भी सहला देता था। उसे हिला हिला कर कविता को असीम आनन्द दे रहा था। कविता की दोनों टांगें ऊपर उठने लगी थी। नतीजा यह हुआ कि उसकी गाण्ड का भूरा-भूरा कमल भी नजर आने लग गया था।