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काफ़ी देर दोनों यों ही दुनिया से बेखबर पड़े रहे। फ़िर रूपा कुछ अलसाई सी पता नहीं क्या बोली और अपना मोबाईल पर कविता को मिस कॉल कर दिया। राजेश भी उठा और जल्दी से कपड़े पहन कर रूपा को चूमा और घर से बाहर निकल गया। कुछ ही देर में कविता मौसा जी के साथ घर आ गई। “अरे, वो राजेश नहीँ आया. . . ?” मौसा ने पूछा। रूपा मुस्करा उठी,”आप जानें .

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