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“तुम सच कैहती हो रोमा, वो अपनी ज़िन्दगी से भाग ही राहा है. ” राज के व्यवहार को देख गीता को एक बार फिर दुख पहुँचा था. उसने कितना प्रयत्न किया था की वो राज को आकर्शित कर सके किंतू वो सफ़ल नही हो पा रही थी. “रोमा मैं अब चलती हूं सोमवार को सुबह् स्कूल मे मिलेंगे. ” गीता इतना कैहकर वाहां से चली गयी. रोमा ने पलट कर अपने भाई की ओर देखा.

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