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जब उसकी आँखें अन्धेरे में देखने को अभ्यस्त हो गयी तो उसने अपने भाई राज के साथ जय और एक लडकी को तालाब की ओर जाते देखा. उसके दिल में फिर से जलन जाग उठी. मन तो किया की दौड कर उनके साथ शामिल हो जाये. पैहले तो मा मना कर दिया करती थी पर अब वो १८ की हो चुकी थी. पर अपनी शर्म की वजह से वो ऐसा ना कर सकी. रोमा ने खिडकी को थोडा खोल दिया जिससे वो उनपर नज़र रख सके.

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