अन्दर पेंटी भी नहीं पहनती थी. कुरता लंबा था इसलिए पजामा भी नहीं पहनती थी. इसके कारण मेरे चूतडों की लचक, बूब्स का हिलना और बदन की लचक नजर आती थी. मैं चाहती थी कि वो किसी तरह से मेरी और आकर्षित हो जाए और मैं उसके साथ अपने तन की प्यास बुझा लूँ. रोज की तरह संजय ने मुझे अपने कमरे में बुलाया. उसने मुझे बैठाया और मुझसे बात करने लगा.
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