. पर मेरी तो ना मानने की ठान रखी है तुमने . . तो मैंने कहा अच्छा ना सॉरी ! . . कहता सॉरी बोल के एहसान कर रही हो . . . और मेरा हाथ पकड़ के उसने मुझे दीवार की तरफ़ धक्का दिया और कहने लगा- मैं तुमसे उमर में भी बड़ा हूँ और सोच में भी, दुनिया तुमसे ज्यादा देखी है, . . . तुम्हें क्या लगता है तुम कोई हूर की परी हो जिसके लिए लड़के मरते हैं?
तो मैंने कहा मेरा हाथ छोड़ो मुझे दर्द हो रहा है।