. . मजा आया . . . ?”
“ज् . . . जी . . . क्या कह रहे है आप . . . ?” मैं सब समझ चुकी थी . . . मैं जानबूझ कर शरमा गई। बस विनय की पहल का इन्तज़ार था, सो उसने पहल कर दी। मेरी चूत फ़ड़क उठी थी। मैंने अपना हाथ नहीं छुड़ाया . . . वह मेरा हाथ खींच कर अपने और समीप ले आया। मेरा बदन थरथरा उठा। चेहरे पर पसीना आ गया।