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” मैं इन सब बातों को सुन कर और गरमा गया और नुपुर्की छूट मी अपना लुंड जोर जोर से पेलने लगा. थोरी देर के बाद मुझेलगा कि मेरा पानी लिकने वाला है और मैं नुपुर से बोला, “ले ले रंदिले अपने छूट मी तुने अपने ससुर से चुद्वा कर उसका पानी भरा था लीब मेरा पानी अपनी छूट मी भर ले. ” नुपुर भी अब झरने के करीब्थी और उसने अपनी चुतर उचल कर बोली, “ला ला मेरे रजा मेरिचूत तू अपने लुंड के पानी से भर दे, एह छूट तो अब तुम दोनो बप्बेते के लौरे के लिए है, तुमलोग जब चाहो इसे अपने पानी से भर्सकते हो, मैं हमेशा एह छूट तुम दोनो के लिए खुली रखूंगी”.

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