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तभी मां ने अचानक मेरा लंड छोड दिया और बोली,
“अभी आती हुं। ”

और एक कातिल मुस्कुराहट छोडते हुए उठ कर खडी हो गई, और झाडियों की तरफ चल दी। मैं उसको झाडियों कि ओर जाते हुए देखता हुआ, वहीं पेड के नीचे बैठा रहा। झाडियां, जहां हम बैठे हुए थे, वहां से बस दस कदम की दूरी पर थी। दो-तीन कदम चलने के बाद मां पिछे कि ओर मुडी और बोली,
“बडी जोर से पेशाब आ रही थी, तुझे आ रही हो तो तु भी चल, तेरा औजार भी थोडा ढीला हो जायेगा।

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